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Sofiya..... princess@sd2979142Dialogbaaz
किसी को पाने की ज़िद में खुद को खोना कैसा,
जो अपना ही नहीं, उसके लिए रोना कैसा।
हमने तो खामोशी में भी बहुत कुछ कहा था,
उसे सुनना ही नहीं था, तो शिकायत कैसी।
अब न किसी से उम्मीद है, न कोई गिला,
जो किस्मत में नहीं था, उसे चाहना ही क्यों भला। 🥀Related
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