जब उसका हक़ छिना, मैं ख़ामोश रहा, आज मेरी बारी है जब मेरी आवाज़ दबी, तुम भी चुप हो, कल तुम्हारी बारी होगीRelated
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जब उसका हक़ छिना, मैं ख़ामोश रहा, आज मेरी बारी है जब मेरी आवाज़ दबी, तुम भी चुप हो, कल तुम्हारी बारी होगीNo comments yet.