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Balaram Jain@balaramjain1889
पुरखैत धूलि भेली टोकरा में छुपायल गेल आ हमर साहस ओहि धूलि केँ नक्शा बना देलक—जखन जेठक धूप हमरा पर ठहरल, तखन बुझलिअ: पुरान घरक गंधे सबसँ दूर कय जाए रहल अछि।

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