P
Pallavi Ganguly@pallaviganguly
हम बिन चाबी कऽ भी द्वार फोड़ैत छी—ताकि दुनिया देखी, छल नहीं, हमर ठोकरें रास्ता बनबैत अछि। अइने त हम ठहरैत नहि: जँ डर आएत, त हम ओकर नांव बदल देब, विजय कऽ लऽऽके।

Related

View all

Comments

No comments yet.