Shayarink5865960 presents

दरिद्र के घर में टेलिविज़न बड़ा, संपन्न के घर में पुस्तकालय बड़ा

A Shayari by Naresh Kumarr

@nk5865960 ·

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@shuklau594 · · Shayari

A shuklau594 Shayari

दोहरे मापदंडों की इस लाचारी पर, तंत्र यहाँ लाचार खड़ा, ईमानदार जो फर्ज निभाए, उस पर ही आघात बढ़ा। नकल माफिया सीना ताने, कानून बना है मोहरा आज, कैसा यह सुधार शिक्षा का, जहाँ व्यवस्था का ढोंग बड़ा!

Starring @shuklau594

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