Shayarijk800231 presents

मैं ज़िंदा तो हूँ, मगर पहले जैसा बाक़ी नहीं हूँ। कुछ रातें नींद नहीं, इंसान का सुकून निगल जाती हैं। हम ख़ुद से मिले तो पता चला, हम कितने अकेले हैं। कभी-कभी इंसान को किसी की नहीं, अपने पुराने वजूद की तलाश होती है। सबसे मुश्किल विदाई वो है, जिसमें इंसान सामने हो और रिश्ता ख़त्म। हम ठीक होने का नाटक करते-करते दर्द छुपाने में माहिर हो गए।

A Shayari by junaid khan

@jk800231 ·

Related

SatveerMaestro
@satveerji · · Shayari

A satveerji Shayari

💔🥀*मैं किस से कहूँ कि घुट रहा हूँ...* मैं किस से कहूँ कि मुझे कितना दर्द है ! *मैं किस से कहूँ कि हार रहा हूँ...* मैं किस से कहूँ कि थक रहा हूँ! *मैं किस से कहूँ कि आराम चाहिऐ...* मैं किस से कहूँ कि रोना चाहता हूँ! *मैं किस से कहूँ कि मन मर रहा है...* मैं किस से कहूँ कि मन डर रहा है! *मैं, मैं, मैं किस से कहूँ!! किस से कहूँ!!*💔🥀

Starring @satveerji

@jk800231 · · Shayari

A jk800231 Shayari

मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी समझना, तुम्हारी सबसे बड़ी ग़लती है। हम वहाँ भी अकेले खड़े रहे, जहाँ लोग अपने साये से डरते हैं। इज़्ज़त माँगी नहीं जाती, किरदार से कमाई जाती है। मेरा वक़्त ख़राब है, किरदार नहीं। हम बदलते नहीं, बस लोगों को उनकी जगह दिखा देते हैं। जो हमें समझ नहीं सके, उन्हें सफ़ाई देने का शौक़ नहीं हमें।

Starring @jk800231

0 comments

No comments yet.