J
junaid khan@jk800231Maestro
मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी समझना, तुम्हारी सबसे बड़ी ग़लती है। हम वहाँ भी अकेले खड़े रहे, जहाँ लोग अपने साये से डरते हैं। इज़्ज़त माँगी नहीं जाती, किरदार से कमाई जाती है। मेरा वक़्त ख़राब है, किरदार नहीं। हम बदलते नहीं, बस लोगों को उनकी जगह दिखा देते हैं। जो हमें समझ नहीं सके, उन्हें सफ़ाई देने का शौक़ नहीं हमें।

Related

View all
10/18/2026

Comments

No comments yet.