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Surjeet Kumar@kumaraurjeetCreator
अर्ज किया है कि खुशियां कम अरमान बहुत है जिसे भी देखो परेशान बहुत है करीब से देखा तो निकला रेत का घर मगर दूर से इसकी शान बहुत है कहते कि सच का कोई मुकाबला नहीं मगर आज जूटो की पहचान बहुत ह मुश्किल से मिलते हैं शहर में आदमीै यूं तो कहने को इंसान बहुत है

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