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Jayanti Jha@jhaj8672Creator
"अरे बाबू भैया, हम तो अंदर बैठ के किस्मत का ताला खोलने गए थे... पर साला ऐसा धमाका हुआ कि पूरे मोहल्ले की खिड़कियां खुल गईं! सोच के गए थे कि शांति से 'सिंहासन' का मजा लेंगे, पर बाहर निकले तो लगा कि सीधे महाभारत के युद्ध से बच के आ रहे हैं। करना था कुछ और, पर किस्मत ने धो डाला कुछ और!"Related
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Aadil Hussain@ah801947
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Subhro Ghosh@subhroghosh6
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Aaruah Pandey@aaruahpandey
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