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Radhesh Pandey@pandeyradhesMaestro
जब तक जीवन में दुख नहीं आएगा सुख की अनुभूत हो ही नहीं सकती सुख और दुख दोनों बारी-बारी जीवन में आते रहते हैं इसलिए न सुख में बहुत प्रसन्न होना और ना दुख में निराश होना।

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