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Aryan Saintal@aryansaintal
वो रात थी 14 अगस्त 1947 की… जब आसमान चुप था, धरती थमी हुई थी, और घड़ी की हर सुई आज़ादी की तरफ दौड़ रही थी। पूरा भारत साँस रोके बैठा था, क्योंकि उस अंधेरे के पार एक नई सुबह जन्म ले रही थी। सदियों की गुलामी अपनी आखिरी साँसें गिन रही थी, और इतिहास एक नया पन्ना लिखने को तैयार खड़ा था।

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