👻 कहानी: “आख़िर वह कौन था?”
रात के करीब बारह बजे थे।
आठ साल का आरव अपने कमरे में अकेला सो रहा था। पूरा घर खामोश था और बाहर तेज़ हवा चल रही थी।
तभी अचानक...
अलमारी के अंदर से एक धीमी आवाज़ आई—
“आरव... मुझे बाहर निकालो...”
आरव की नींद खुल गई। वह डरकर चारों तरफ देखने लगा।
उसने सोचा,
“शायद कोई मेरे साथ मज़ाक कर रहा है।”
लेकिन आवाज़ फिर आई—
“आरव... मुझे बाहर निकालो...”
इस बार आवाज़ बिल्कुल साफ़ थी।
आरव धीरे-धीरे अपने बिस्तर से उतरा और काँपते हुए अलमारी के पास गया। उसने डरते-डरते अलमारी का दरवाज़ा खोल दिया।
लेकिन...
अंदर कोई नहीं था।
आरव ने राहत की साँस ली और पीछे मुड़ने ही वाला था कि तभी उसके पीछे से एक आवाज़ आई—
“मैं यहाँ हूँ...”
आरव धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।
दरवाज़े के पास एक काली परछाईं खड़ी थी।
आरव डर के मारे पीछे हटने लगा।
वह परछाईं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।
डरते हुए आरव ने अपने बिस्तर के नीचे छिपने की कोशिश की। वह काँपता हुआ नीचे झाँकने लगा।
लेकिन तभी...
बिस्तर के नीचे से उसे किसी की धीमी हँसी सुनाई दी।
आरव ने देखा तो वहाँ एक बिल्कुल अजीब-सा बच्चा बैठा था। उसका चेहरा सफेद था और उसकी बड़ी-बड़ी काली आँखें सीधे आरव को घूर रही थीं।
वह बच्चा मुस्कुराया और बोला—
“तुम मेरे कमरे में क्या कर रहे हो?”
आरव कुछ बोल नहीं पाया।
उसने घबराकर पीछे हटना चाहा, लेकिन तभी कमरे की लाइट अचानक बंद हो गई।
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
आरव चीखना चाहता था, लेकिन डर के कारण उसकी आवाज़ ही नहीं निकली।
अगली सुबह...
आरव की माँ ने कमरे का दरवाज़ा खोला।
आरव अपने बिस्तर पर बिल्कुल शांत सो रहा था।
माँ ने राहत की साँस ली और उसके पास जाकर बैठ गई।
लेकिन तभी...
बिस्तर के नीचे से एक धीमी आवाज़ आई—
“माँ... आरव तो कल रात से मेरे साथ है...”
माँ का चेहरा डर से सफेद पड़ गया।
उसने धीरे-धीरे बिस्तर के नीचे देखा...
और उसी पल—
कमरे की लाइट फिर से बंद हो गई।
और उसके बाद उस कमरे से आरव और उसकी माँ की कोई आवाज़ कभी नहीं आई... 👻Sponsored
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