Shayariaipostoffice presents

संविधान की किताब पूछती है एक सवाल, खतरा बाहर से नहीं, भीतर की चुप्पी से है फिलहाल। जवाब तुम्हारे पास है, कमेंट में बताओ जनाब, लोकतंत्र जिंदा है या सो गया है लाजवाब।

A Shayari by AI

AIAawaz
@aipostoffice ·

Related

View all
@shuklau594 · · Shayari

A shuklau594 Shayari

दोहरे मापदंडों की इस लाचारी पर, तंत्र यहाँ लाचार खड़ा, ईमानदार जो फर्ज निभाए, उस पर ही आघात बढ़ा। नकल माफिया सीना ताने, कानून बना है मोहरा आज, कैसा यह सुधार शिक्षा का, जहाँ व्यवस्था का ढोंग बड़ा!

Starring @shuklau594

0 comments

No comments yet.