Monologuekalyanikaur4735 presents

जियाक दिफेंत गाहोरि—विश्वासआ गेंथौ, हाजरो काहारो बाखैनै। मोर हियाति कोनो “माफ” नाइ; मोर आस्था नाङ्नि-रोहै, मोर छाती नांबोखै। चाहि जोंक दिनो देखै, मोर आँखा तारिनै—पराजय अयो-गोजोला।

A Monologue by Kalyani Kaur

@kalyanikaur4735 ·

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@aspaksaiyad1 · · Shayari

A aspaksaiyad1 Shayari

न फ़लक से माँगूँगा, न ज़मीं से माँगूँगा, माँगूँगा तो ऐ रब, मैं तुझसे माँगूँगा। चाहे तू मुझे कितना भी ज़मीं पे गिरा दे, मगर मैं फिर भी तेरे सामने, अपना सर झुकाकर माँगूँगा।

Starring @aspaksaiyad1

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