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Sundar Jha@sundarjha1908
ऑफिस च पुछे-पूछे मुस्कुराणा पड़ेआ: “सब ठीक?”
पर जिहड़ि फाइल तेरी मेज़ पर रही—उही मेरी नींद ले गई।
आज तैं तर्कदान बन के बैठ्या, अंजान—मिन्झे हारकठोर सन्नाटा।
आखर ई राजनीति रुल्ला है: अपना हाथ हत्थे थकुड़, मनै दरार।Related
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