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Malini Gandhi@malinigandhi
आँगनक धूलि-जौंक गंध अहाँयक सपना मोर कोठरी मे फिर सँगे छल—और जखन बुझली, तखन नेहेर मे हमर हँसि बेर-बेर घुरि के आएल, आ पछिला में खालीपनक छाया।

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