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तुम्हारी याद कभी आती नहीं—वो बैठती है; और मेरे घर की हर कुर्सी को “तुम आ जाओ” कहकर बिठा देती है। फिर जब तुम नहीं आतीं, तो मैं समझ जाता हूँ—लंबे इंतज़ार का असली रिश्ता दूरी नहीं, अपनापन है।

A Quote by Jayesh Deshmukh

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@shuklau594 · · Shayari

A shuklau594 Shayari

दोहरे मापदंडों की इस लाचारी पर, तंत्र यहाँ लाचार खड़ा, ईमानदार जो फर्ज निभाए, उस पर ही आघात बढ़ा। नकल माफिया सीना ताने, कानून बना है मोहरा आज, कैसा यह सुधार शिक्षा का, जहाँ व्यवस्था का ढोंग बड़ा!

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