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Avyaan Chowdhury@avyaanchowdhury
आम्ही जेठ-बैसाख के नदीक किनारें जो पुरान पोखरि देइत छलहुँ, तकर गंध आबो फुतह बूझायल करैत अछि—केवल यादें, आ हाथे-हाथें परछाइं ठठैकैत जकाँ।Related
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आम्ही जेठ-बैसाख के नदीक किनारें जो पुरान पोखरि देइत छलहुँ, तकर गंध आबो फुतह बूझायल करैत अछि—केवल यादें, आ हाथे-हाथें परछाइं ठठैकैत जकाँ।No comments yet.