Shayariraginikhatri4171 presents

म त्यसैको कुर्सीमा बसेर पनि स्थिर हुन सक्दिन—मेरो भित्रको बेचैनीले नै मलाई “जाँऊ” भनिरहेको छ। तिमीले ढोका बन्द गर्‍यौ भने—म आफ्नै छातीभित्र अर्को ढोका खोल्छु। 🖤

A Shayari by Ragini Khatri

@raginikhatri4171 ·

Related

View all
@jhaj8672 · · Quote

A jhaj8672 Quote

"यह बारिश का मौसम, ये पानी की बूंदें और यह कागज़ की कश्ती... दिखने में भले ही कितनी भी सस्ती हो, लेकिन जब ये यादों के दरिया में उतरती है ना, तो दिल के सबसे महंगे जज्बातों को खरीद लेती है।"

Starring @jhaj8672

0 comments

No comments yet.