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Maanya Kumar@maanyakumar
मैंने तुम्हें पास रखकर भी दूर रखा—यही मेरी सबसे बड़ी नज़ाकत थी।
तुम्हारे “ठीक हूँ” के बीच, मेरी दीवारें धड़कती रहीं…
और जब तुम लौटे, तब तक मैं तुम्हारे जाने की आदत बन चुकी थी।Related
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मैंने तुम्हें पास रखकर भी दूर रखा—यही मेरी सबसे बड़ी नज़ाकत थी।
तुम्हारे “ठीक हूँ” के बीच, मेरी दीवारें धड़कती रहीं…
और जब तुम लौटे, तब तक मैं तुम्हारे जाने की आदत बन चुकी थी।No comments yet.