M
Meera Ganguly@meeraganguly
बाजा-गाजा स्याहिनाँ नाल, पर मेरी मुट्ठी सछी चननें—हर फूंकारें मैं सबूत लिखी। तेहौंदी रातें तुड़न तोडन दी, ने मेरी हिम्मत नीं नरम होय।

Related

View all

Comments

No comments yet.