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Pravin Malik@pravinmalik
त्योहारक गीत गाएन, दिले चुपचाप टहलक देलक—“आउ, हमर ठेकान में आ जा।” हाथ में मिठाई रहितो, आँखि में नमक आइल; किएक तँ आचरि सभक रंग, ताहि के बिना फीका पड़ैत अछि। ई रात हम गाछी नय, बस तकरा कोमलता देखैत छी—तेँ दर्दो मिठ्ठ लागएत अछि… मुदा केवल उहि क्षण धरि।

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