Dilli Ki Aakhri Train
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Dilli Ki Aakhri Train

The Premise

Purani Dilli station par midnight ko jashn ki roshni jal rahi thi jab platform number four par ek zang lagi train ruki jise 80 saal se koi nahi chalata tha. Darwaza khula aur andar se ek khat gira jispar likha tha ki batwaare mein bichhda pariwaar aaj phir milne wala hai.

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Community POVs

Rashid TT

  • रात के ठीक 12 बजकर 17 मिनट हुए थे। पुराने दिल्ली स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर अचानक एक लंबी सीटी गूँजी। फूँऽऽऽऽ! धुंध के बीच वही पुरानी ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर आकर रुक गई। लड़का घबराकर ट्रेन की तरफ बढ़ा ही था कि पीछे से एक बूढ़ी आवाज़ आई— “अगर अपनी जान प्यारी है… तो इस ट्रेन में चढ़ने की गलती मत करना।” लड़का पलटा। सामने करीब 70 साल का एक बूढ़ा खड़ा था। उसके हाथ में पुराना टिकट पंच करने वाला औजार था और सीने पर धुंधला-सा बैज लगा था। लड़के ने पूछा— “आप कौन हैं?” बूढ़े ने कहा— “मैं इस स्टेशन का आख़िरी टिकट चेकर था।” लड़का चौंका। “था?” बूढ़ा मुस्कुराया— “हाँ… क्योंकि जिस रात ये ट्रेन आख़िरी बार चली थी, उस रात के बाद मैंने कभी ड्यूटी नहीं की।” लड़के ने जेब से वही पुराना टिकट निकाला और पूछा— “क्या आप इस टिकट को जानते हैं?” टिकट देखते ही बूढ़े का चेहरा बदल गया। उसने कांपते हुए कहा— “ये टिकट… तुम्हें कहाँ मिला?” लड़के ने पूरी बात बताई। बूढ़े ने कुछ पल टिकट को देखा और फिर बोला— “इस टिकट पर तारीख गलत नहीं है…” “बल्कि यही वो तारीख है… जिस रात इस ट्रेन में बैठे सभी यात्री गायब हो गए थे।” लड़का डरकर बोला— “सभी यात्री?” बूढ़े ने सिर हिलाया। “ट्रेन अगले स्टेशन तक पहुँची ही नहीं।” फिर उसने धीमी आवाज़ में कहा— “लेकिन हर साल उसी रात… ये ट्रेन वापस आती है।” लड़के ने पूछा— “और इसमें कौन बैठता है?” बूढ़े ने ट्रेन की खिड़कियों की तरफ देखा। अंदर कई लोग बैठे दिखाई दे रहे थे। लेकिन सबसे डरावनी बात ये थी कि… उनमें से किसी के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। बूढ़े ने कहा— “ये वो लोग हैं… जो उस रात अपने परिवार से मिलने जा रहे थे।” लड़का बोला— “तो फिर ये ट्रेन कहाँ जाती है?” बूढ़े ने जवाब दिया— “जहाँ से कोई वापस नहीं आता।” तभी ट्रेन के अंदर से एक महिला की आवाज़ आई— “टिकट चेकर साहब… मेरा टिकट चेक कर लीजिए।” बूढ़ा अचानक पीछे हट गया। उसने लड़के से कहा— “मेरी बात ध्यान से सुनो। ट्रेन में मत चढ़ना।” लेकिन तभी लड़के ने अपना टिकट देखा। उस पर एक नई लाइन दिखाई दे रही थी— “सीट नंबर 27 — यात्री का इंतज़ार है।” बूढ़ा टिकट देखते ही बोला— “नहीं… ये नहीं हो सकता!” लड़के ने पूछा— “क्या हुआ?” बूढ़े ने कांपती आवाज़ में कहा— “सीट नंबर 27 उस रात खाली थी…” “और आज तक… उस सीट पर किसी को नहीं बैठना था।” अचानक ट्रेन का दरवाज़ा खुला। अंदर से आवाज़ आई— “आपका टिकट… तैयार है।” लड़का दरवाज़े के सामने खड़ा रह गया। अब उसे तय करना था— ट्रेन में चढ़कर 80 साल पुराने रहस्य का सच जानना है… या हमेशा के लिए वहाँ से भाग जाना है। लेकिन तभी बूढ़े टिकट चेकर ने उसका हाथ पकड़ लिया और फुसफुसाया— “अगर तुम अंदर गए… तो वापस आने का रास्ता मैं भी नहीं बता पाऊँगा।”

    @mehndikhan12

  • Tum mera ho serfha Mera

    @sarojsarumag

  • mughe to ouch nahi pata hai

    @neupaneprana

Simran

  • nahi banna tha kahanike hissa re.

    @neupaneprana

Dilli Ki Aakhri Train - POV Baazi | Dialogbaaz