Chhat Pe Aakhri Kash
hiEnded

Chhat Pe Aakhri Kash

The Premise

Raat ke do baje Aarav chhat pe chhupke cigarette jala raha tha jab darwaza khula aur uski maa ki chappal ki awaaz aayi. Peeche mudte hi lighter uske haath se gira, aur roshni mein woh chehra dikha jise dekhte hi uska dil ruk gaya.

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Community POVs

Aarav

  • अरे हे काय आहे मला काही न वाटता तू कसा आला

    @bhosaleadity

  • मम्मी पापा जैसे दिखते हैं वैसे है नहीं वह अपने अंदर दो चेहरे छुपा के रखे है।

    @bosesudipta7

  • मैं तुम्हें कुछ नहीं कहना चाहता हूं

    @tikarampali2

  • यूँ ही खत्म हो जायेगा जा़म की तरह जिन्दगी का सफ़र कड़वा ही सही एक बार तो नशे में होकर इसे पिया जाये।

    @kankulkumar8

  • ha mari Jaan

    @rajkumarbara

  • miss you 💔🥀💯

    @senbala388

Sunita

  • छत पर आख़िरी कश रात के करीब दो बजे आरव छत पर बैठा चुपके से सिगरेट पी रहा था। घर में सब सो रहे थे। तभी पीछे से चप्पलों की हल्की-सी आवाज़ आई। आरव ने पलटकर देखा तो उसकी माँ दरवाज़े पर खड़ी थीं। माँ की नज़र सिगरेट पर पड़ी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस धीरे से बोलीं— “बेटा… इतनी रात को यहाँ अकेले क्यों बैठे हो?” आरव ने सिगरेट बुझा दी। “कुछ नहीं माँ… बस नींद नहीं आ रही थी।” माँ उसके पास आकर बैठ गईं। कुछ देर दोनों चुप रहे। फिर माँ ने आरव का हाथ अपने हाथ में लिया और बोलीं— “तू जानता है, जब तू छोटा था ना… तो रात में डरकर मेरे पास आकर सो जाता था।” आरव मुस्कुराया। “हाँ माँ, तब मैं छोटा था।” माँ ने उसके चेहरे की तरफ देखा। “मेरे लिए तू आज भी वही छोटा बच्चा है।” आरव की मुस्कान गायब हो गई। माँ की आँखों में आँसू थे। “मुझे तेरी सिगरेट से ज्यादा डर इस बात का लगता है कि कहीं मेरा बेटा अपने अंदर का दर्द मुझसे छुपाना न सीख जाए।” आरव ने पहली बार माँ की तरफ गौर से देखा। “माँ… आपको कैसे पता कि मैं परेशान हूँ?” माँ मुस्कुराईं। “माँ को बताना नहीं पड़ता बेटा… माँ चेहरे से पढ़ लेती है।” आरव की आँखों में आँसू आ गए। वह माँ के कंधे पर सिर रखकर बोला— “माँ… मैं थक गया हूँ।” माँ ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा— “तो थोड़ा रो ले बेटा… लेकिन खुद को मत तोड़।” कुछ देर तक आरव माँ के कंधे पर सिर रखे रोता रहा। माँ ने उसे कुछ समझाने की कोशिश नहीं की। बस उसके सिर पर हाथ फेरती रहीं। उस रात आरव ने सिगरेट नहीं पी। उसने सिर्फ इतना कहा— “माँ, कल से मैं कोशिश करूँगा इसे छोड़ने की।” माँ ने उसके माथे को चूमा और कहा— “मुझे तेरी कामयाबी से ज्यादा तेरी सलामती चाहिए।” और उस रात आरव को समझ आया— दुनिया में बहुत लोग हमारी गलतियाँ देखते हैं… लेकिन माँ वो होती है जो हमारी गलती के पीछे छुपा दर्द देख लेती है। कभी माँ की चिंता को रोक-टोक मत समझना… क्योंकि जिस दिन माँ की आवाज़ में चिंता नहीं होगी, शायद उस दिन उसकी ज़िंदगी में हमारी जगह भी कम हो चुकी होगी।

    @mehndikhan12

  • "सबको लगता है माँ बहुत मजबूत है, पर कोई उस माँ से पूछे जो अकेले में अपने आँसू पोंछती है।""माँ के चेहरे की झुर्रियां सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि वो दर्द बयां करती हैं जो उसने हंसते-हंसते छुपाया है।"

    @gg5032144

Riya

  • ab to samay ka intjar hai

    @gg5032144

Vikram

  • लोग पूछते हैं तुम्हारी गहरी दोस्ती का राज़ क्या है, हम हँसकर कहते हैं "कांड साथ में किए हैं"। तू मैं और हमारा टपरी वाला सिगरेट। और हमारी बिंदास लाइफ। वाह! लाइफ़ हो तो ऐसी। क्यों मेरे बचपन के प्यार मेरे यार

    @gg5032144