Monologuetashusataksh presents

मैं भी इंसान हूँ..." 🌧️🕊️ हर रोज़ मुस्कुराता हूँ, पर कभी-कभी रोता भी हूँ, भीड़ में सबसे मिलता हूँ, पर अंदर से खोता भी हूँ। हर चेहरे पे हँसी बाँटता हूँ, पर अपने ग़म किसी से नहीं कहता, क्योंकि मैंने सीखा है — हर सवाल का जवाब देना ज़रूरी नहीं होता। मैं पत्थर नहीं… जो ठोकरें खा के भी आवाज़ न करे, मैं भी इंसान हूँ… जो कभी-कभी टूटकर खुद से ही माफ़ी माँग ले। कभी किसी की जीत में तालियाँ बजाईं, तो कभी खुद की हार पे चुपचाप सिर झुकाया। मैंने रिश्तों को बचाने में खुद को खोया, पर कभी किसी को ये एहसास तक नहीं होने दिया। लोग कहते हैं — "तू तो मजबूत है यार..." पर कोई नहीं जानता — मजबूती की इस दीवार के पीछे एक थका हुआ दिल हर रात बिखरता है। मैं दिखता हूँ शांत समंदर सा, पर अंदर ज्वार उठते हैं — रोज़… हर लम्हा। कभी-कभी जी चाहता है — कि कोई पूछे... "तू ठीक तो है ना?"

A Monologue by RJ Satakshi

@tashusataksh ·
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SonuMaestro
@shashi.1547 · · Shayari
मत खोल खिड़कियां दिल की 
              इसमें बेगाने भी आते है...

सब नही होते प्यार करने वाले 
       यहां कुछ सताने भी आ जाते है...
😢
@sd2979142 · · Shayari

A sd2979142 Shayari

खामोशी भी कभी सब कुछ बयां कर जाती है, कुछ लोग अपनी तन्हा दुनिया में खो जाते हैं। जो समझते हैं हमें किसी बात से फर्क नहीं पड़ता, वो क्या जानें मुस्कान के पीछे कितने आंसू छुप जाते हैं। 🥀

Starring @sd2979142

@sd2979142 · · Shayari

A sd2979142 Shayari

कुछ बातें लफ़्ज़ों में बयां नहीं होतीं, कुछ मुलाक़ातें मुकम्मल नहीं होतीं। 🥀 वक़्त सिखा देता है मुस्कुराना भी, वरना हर मुस्कान के पीछे खुशियाँ नहीं होतीं। 🖤✨

Starring @sd2979142

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