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Radhesh Pandey@pandeyradhesMaestro
जो मेहनत और कर्म नहीं करता उसे स्वर्ग भी मदद नहीं करता

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Radhesh Pandey@pandeyradhesMaestro
जिसको अशुद्ध रहना हो वह रहे जिंदगी भर रहे किसी को क्या फर्क पड़ता है लेकिन शुद्धिकरण एक प्रक्रिया है जो निर्जरा से शुरू होती है आप किसी को ऐसा लगता है की शुद्धिकरण जरूरी नहीं है तो वह सूअर के साथ भोजन करें यहां तक की गंदी जगह बैठकर के भजन करें गंदा ही भोजन करें किसी को क्या फर्क पड़ता है।लेकिन जो देश समाज और भविष्य के लिए चिंतित है वह ऐसा करने से रोकेगा इसलिए शुद्धिकरण राजनीतिक शब्द नहीं होना चाहिए। यह एक आंतरिक और व्यवस्थित क्रिया है जैसे स्नान के बाद पूजा पाठ ध्यान फिर भजन। भोजन तो बिना स्नान किए बिना हाथ धोए बिना सफाई के भी किया जा सकता है लेकिन क्या ऐसा भोजन आपको ऊर्जा देगा। जब खाते ही मन प्रसन्न हो जाए तो दुगनी ताकत से वह ऊर्जा को प्राप्त होती है और अच्छा भोजन भी खाते समय विकार को प्राप्त हो जाए तो वह ऊर्जा की जगह आपको दुखी करेगी ।कहा गया है रहिमन रहिला की भली जो परसे मन लाय परसत मन मैला करें तो मैदा भी जरि जाए।
1h ago

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