तू ख्वाब बनके रोज़
छू लेता है मुझको यूं ही,
कौन कहता है कि फासलों में
मुलाकात नहीं होतीं !!
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तू ख्वाब बनके रोज़
छू लेता है मुझको यूं ही,
कौन कहता है कि फासलों में
मुलाकात नहीं होतीं !!
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