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Radhesh Pandey@pandeyradhesMaestro
जिसके रग रग में रहती गद्दारी ह उसी शख्स से मेरी रिश्तेदारी है आना-जाना अब भी होता रहता है कुछ उसकी मजबूरी है कुछ अपनी लाचारी है हम भी आगे निकल गए होते साहब यदि जिंदा मक्खी निगल गए होते साहब लेकिन यह सब मुझसे नहीं हुआ अपने खून में घुसी हुई खुद्दारी है

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