R
Radhesh Pandey@pandeyradhesMaestro
हर आदमी को भरम है उससा नहीं कोई
मैं भी इसी भरम में था मुझसा नहीं कोई
लेकिन मेरी गाली पे भी
हंसता रहा जो तू
विश्वास हो चला है कि
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हर आदमी को भरम है उससा नहीं कोई
मैं भी इसी भरम में था मुझसा नहीं कोई
लेकिन मेरी गाली पे भी
हंसता रहा जो तू
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