Shayaridilipdilipna presents

भीतर झांक कर देखो: हे मानव! तुम ईश्वर को बाहर की दुनिया, मंदिरों और पत्थरों में ढूंढ रहे हो, जबकि मैं तुम्हारे भीतर ही चेतना के रूप में वास करता हूँ। स्वयं को पहचानो। ​संतुष्टि में ही सुख है: इस भौतिक संसार की अंधी दौड़ और अंतहीन इच्छाओं के पीछे भागना बंद करो; मन को शांत रखो, क्योंकि असली आनंद वैराग्य और संतोष में है। ​प्रकृति का सम्मान करो: मैंने तुम्हें एक सुंदर और संतुलित धरा सौंपी थी, लेकिन तुम्हारे लालच ने इसे संकट में डाल दिया है; प्रकृति की रक्षा करो, क्योंकि प्रकृति ही शक्ति का रूप है। ​विष पीना सीखो: जीवन में जब भी नकारात्मकता, क्रोध या ईर्ष्या जैसी परिस्थितियां आएं, तो उन्हें अपने भीतर रख कर दबाना सीखो (नीलकंठ बनो) और दुनिया को केवल प्रेम और करुणा ही वापस लौटाओ। ​मोह का त्याग करो: यह शरीर और संसार नश्वर है, यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं है; इसलिए किसी भी वस्तु या व्यक्ति के अत्यधिक मोह में पड़कर अपने वर्तमान को नष्ट मत करो, ​अहंकार से दूरी बनाओ: तुम्हारा अहंकार ही तुम्हारे विनाश का कारण है; याद रखो

A Shayari by DILIP Nayak

@dilipdilipna ·
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