Shayarikrishivghosh7405 presents

मैंने भी “शांत” बनना चाहा था—पर भीतर का मातम किसी मरहम से नहीं रुकता। लोग कहते हैं छोड़ दे… पर छोड़ना तब होता है जब खोना तय नहीं होता।

A Shayari by Krishiv Ghosh

@krishivghosh7405 ·

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@kumaraurjeet · · Quote

A kumaraurjeet Quote

की अर्ज किया है... सावन गया तो लोग 🌿भोले को भूल गए अब यह सब 9 दिन माता का गुणगान गाएंगे और तुम इंसान होकर किसी से उम्मीद लगाए बैठे हो लोगों की तो छोड़ो भगवान भी समय से बदल जाएंगे... 🌸 राधे राधे 🌸

Starring @kumaraurjeet

@rdeepchandra · · Monologue

A rdeepchandra Monologue

आपसे जितना हो सके अपने जीवन की समस्त परेशानी दुख दर्द को साहस के साथ निपटाते रहे और जहां आप हारने लगेंगे वहां परमात्मा किसी न किसी रूप में आकर आपकी मदद अवश्य करेगा और आपके दोस्त भाई बंधु सारा जमाना किसी से भी मदद की जरा सी भी उम्मीद आशा न रखें धन्यवाद

Starring @rdeepchandra

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