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Geeta Kumar@geetakumar58
जदों लोकियां कहन “चुप रह” ताँ मेरी आवाज़ रस्ता बन जाँदी ऐ—चुप्पी मेरा हार नि, मेरा ताला-बन्द गुस्सा ऐ। नेतृत्व तख़्त़ा नि उठाउनदा; नेतृत्व ऊही है जे जिद्द नाल दरवाज़ा खौले।

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