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Sahil Lal@sahillal7635
कहिये न—ओठ पर मुस्कान रखै, तकरा आँखि सभ जख्मी होइत अछि; मुदा जखन अहाँक आवाज़ सुनैत छी, ई चोटों परो मिठ्ठा लगैत अछि। और फेर—जे अहाँ दूर होइतु तऽ नहि, मुदा जखन अहाँ नजरे मे होइतु तऽ सेहो अदृश्य बनि जाइत छी।

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