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Aadrika Kulkarni@aadrikakulkarni1993
घड़ी क़लम नहीं लिखत — वक़्त ही मेरा नज़्म तोड़त,
और जो “बाद में” बोलत थे, आज़ वक़्त के साए में गुम।Related
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घड़ी क़लम नहीं लिखत — वक़्त ही मेरा नज़्म तोड़त,
और जो “बाद में” बोलत थे, आज़ वक़्त के साए में गुम।No comments yet.