Short Storyarchanatamil presents

শহরের ট্রামলাইন যেখানে শেষ হয়, সেখানেই আমার শৈশব থামে—বারবার ফিরে তাকালেই ধুলো-দেওয়া বিকেলটা এসে কাঁধে হাত রাখে। তুমি ছিলে না, তবু তোমার নামে চা-দোকানের আলো জ্বলে থাকত… আজও মনে হয়, না বলা সেই একটা সংলাপই আমাকে বড় করেছে—আর আমারই বুক থেকে তোমাকে মুছে দেয়।

A Short Story by Archana Tamil

@archanatamil ·

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@jhaj8672 · · Dialogue

A jhaj8672 Dialogue

"अपुन का एक ही उसूल है बॉस... बेवजह हाथ उठाने का नहीं। पर जब अपुन का हाथ उठता है ना, तो मुर्दे में भी जान आ जाती है, वो उठ खड़ा होता है... और फिर सीधा ऊपर जाके अपुन की शिकायत करता है!"

Starring @jhaj8672

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