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Shreyansh Yadav@shreyanshyadav
काम की फाइलां कदों-कदों ति उदास हो जांदियां: कूर्ची दे कोल बैठ के वी खालीपन चलदा रहिंदै।
मैं छापे मारदा रहिंदै, पर मेरे भीतर दफ्तरी जंगल चੁپचाप सूक्खी हो जांदी।
अंतें शाम आके पूछदी—“तू थक गया?”—आं मैं जवाब देई: “नहीं… मैं बहि चुकआ।”Related
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