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Advik Ghosh@advikghosh
आँखि में आश्चर्य क’ए बिसरैत छी—हँसला के बादो तकरा मौन क’ए दुखि रहैत अछि। क’हियो नै कहियैक चाही, जखन बुझि जाइत छिअः किछु दूरी अपनहि संगे चलैत रहैत अछि।

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7/13/2026
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