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Sundar Sharma@sundarsharma1347
वियोग के बाद सीखलहुँ—आशा नहि तुटैत, ताहि द्वारा हम तुटैत छी। जेना दीपक अपना तेल खाइत रहैत अछि, तैना हमो चुपचाप जलि रहलहुँ… आ बुझैत अछि जे—अब शिखर नहि, राख मात्र बाचैत अछि।

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