Monologuekewatsanjay0 presents

सुनो दुनिया वालों… हम वो कहानी नहीं, जो दो पन्नों में खत्म हो जाए। हम वो अध्याय हैं, जो पीढ़ियाँ याद रखें। आज लोग हँसते हैं, सपनों को छोटा कहते हैं, मेहनत पर सवाल उठाते हैं… पर उन्हें क्या पता? मजबूत इरादों को रोकने की औकात किसी में नहीं होती। गरीबी भी देखी, अपनों की बेरुखी भी, और तानों का शोर भी— पर दर्द ने तोड़कर नहीं, हमें और जोड़कर मजबूत बनाया। जेब खाली थी, सपने बड़े थे… साथ नहीं था, हौसला खड़ा था… और जब लोग गिरता देखकर खुश थे, हम खुद को उस दिन से ज्यादा ताकतवर बनाते गए। याद रखना—हमारी चुप्पी डर नहीं… शांत समुद्र में भी तूफान छिपा होता है। और जब वो आता है, तो बड़े-बड़े महल हिल जाते हैं। हम नकल नहीं करते, हम अपना रास्ता लिखते हैं— क्योंकि भीड़ आसान चुनती है, हम जीतने की वजह बनते हैं।

A Monologue by Sanjay Kewat

@kewatsanjay0 ·
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