Shayarimv9818368 presents

"ना मोबाइल था, ना इंटरनेट का ज़माना था, बस मिट्टी में खेलना ही ख़ज़ाना था। वो हँसी, वो रोनक, वो बचपन की टोली, अब तो बस यादों में ही बची है वो होली।"

A Shayari by Mahesh Vaishnav

@mv9818368 ·

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