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Reyansh Singh@reyanshsingh2728
मैं “काम” लिखता हूँ, पर स्याही में तुम्हारी कमी घुली रहती है—ऑफिस की लाइट जलती है, यादों की नहीं।Related
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मैं “काम” लिखता हूँ, पर स्याही में तुम्हारी कमी घुली रहती है—ऑफिस की लाइट जलती है, यादों की नहीं।No comments yet.