Monologuekapilkapil10 presents

मैं अक्सर ख़ुद से पूछता हूँ—क्या ये पीड़ा मेरे हृदय‑के भीतर गहराई तक उतर गई है, या यह वह खामोशी है जो तुम्हारी अनुपस्थिति में कमरे को घेर लेती है। लोग कहते हैं कि समय हर घाव को भर देता है; पर मेरे लिये तो समय बस इस दर्द के साथ जीने की कला सिखाता है। आज भी, जब खिड़की के बाहर बूंदें टपक रही हैं, मेरा दिल तुम्हें नहीं ढूँढ़ता; वह सिर्फ उस ‘हम’ की परछाई को खोजता है, जो कहीं गुम हो गया।

A Monologue by Kapil Kapil

@kapilkapil10 ·
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@nirmalmaraiy · · Monologue

A nirmalmaraiy Monologue

आज नमी है आज सब कोई गया है नमी का मेला देखने और एक मैं हूं की अपने काम पर बहुत ज्यादा बिजी हूं सभी का दोस्त फैमिली सभी लोग जा रहे हैं एक मैं ही नहीं जा रहा हूं

Starring @nirmalmaraiy

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